Sunday, 15 February 2015

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों


चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिल नवाजी की
न तुम मेरी तरफत देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल के धड़कन लडखडाये मेरी बातों में
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से
चलो इक बार फिर से..

तुम्हें  भी कोई  उलझन  रोकती  है  पेशकदमी  से
मुझे  भी  लोग  कहते  हैं  कि  यह  जलवे  पराये  हैं
मेरे  हमराह  भी  रुस्वाइयां  हैं  मेरे  माझी  की
तुम्हारे  साथ  भी  गुजरी  हुई  रातों  के  साए  हैं
चलो  इक बार  फिर  से ..

तारुफ़  रोग  हो  जाए  तो  उसको  भूलना  बेहतर
ताल्लुक  बोझ  बन  जाए  तो  उसको  तोड़ना  अच्छा
वोह  अफसाना  जिसे  अंजाम  तक  लाना  न  हो  मुमकिन
उसे  इक  खूबसूरत  मोड़  देकर  छोड़ना  अच्छा
चलो  इक  बार  फिर  से ..
चित्रपट -गुमराह 
गायक -महेंद्र कपूर 

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